मजदूरों के भुगतान पर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा , कि कहां गायब हो गए तुम्हारे 20 हजार करोड़ रुपए , अब पहुंचेंगे जनता तक तुम्हारे 20 हजार करोड़ रुपए

एक कहावत तो आपने सुनी होगी कहने में और करने में बहुत बड़ा फर्क होता है। यानी शुद्ध हिंदी में अगर कहा जाए तो कथनी और करनी में फर्क होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश की जनता को संबोधित करते हुए 20 लाख करोड रुपए का ऐलान किया था। बल्कि इस 20 लाख करोड़ के ऐलान से मन में बस थोड़ी देर मन में शांति की जा सकती है।
आपको बता दें लॉक डाउन के दौरान कारखानों में काम कर रहे मजदूरों के वेतन को भुगतान लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। और इस मामले की सुनवाई जस्टिस कौल ने की। मजदूरों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्ता ने कहा कि आपके 20 हजार करोड़ों रुपए कहां गए। जज साहब के सवाल पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अपने बयान में कहा कि यह छोटे बड़े और बीच के उद्योगों को यह रकम दी गई है । और सरकार इस पर बेहतर काम कर रही है
लॉक डाउन से पहले मजदूर कारखानों में काम कर रहे थे लेकिन जब लॉक डाउन लगा तो कारखाने बंद हो गए मजदूरों को परिवार चलाना मुश्किल हो गया जो मजदूर दूसरे प्रदेश के थे और जिनके पास इतना पैसा नहीं था कि वह रुके रहे वे अपने घर की ओर चले आए। कारखाना बंद होने के बाद सभी मजदूरों का वेतन भी रोक दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब टीवी पर भाषण देने आए तब देश की जनता उनको बेसब्री से इंतजार कर रही थी कि मजदूरों के लिए कुछ ना कुछ मोदी जी मदद करेंगे टीवी पर आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबा चौड़ा भाषण सुनाया 20 मिनट तक उन्होंने इतिहास को पलट कर रख दिया 20 मिनट के बाद इतिहास की उधेड़बुन करते हुए उन्होंने बताया की 
आर्थिक पैकेज के तहत 20 लाख करोड़ रुपए की योजना है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब टीवी पर भाषण देने आए तब देश की जनता उनको बेसब्री से इंतजार कर रही थी कि मजदूरों के लिए कुछ ना कुछ मोदी जी मदद करेंगे टीवी पर आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबा चौड़ा भाषण सुनाया 20 मिनट तक उन्होंने इतिहास को पलट कर रख दिया 20 मिनट के बाद इतिहास की उधेड़बुन करते हुए उन्होंने बताया की आर्थिक पैकेज के तहत 20 लाख करोड़ रुपए की योजना है

20 लाख करोड़ रुपए का नाम सुनते ही मजदूरों का दिल खुश हो गया कि चलो ठीक है अब हमें कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन वह 20 लाख करोड रुपये के आर्थिक पैकेज को अंदर टटोलने की कोशिश की तब पता चला कि आर्थिक पैकेज का मतलब ही कुछ और है। सीधी भाषा में कहिए जिस तरीके से मजदूरों के लिए जीएसटी को समझना मुश्किल था। उसी तरीके से 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज को भी समझना बहुत मुश्किल है। लेकिन अब मजदूरों की याचिका पर फैसला 12 जून को होगा।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)