#लेडी_सिंघम_सुनीता_यादव...विडियो पूरे देश में फैलनी चाहिए.. आप सब की जिम्मेदारी है वरना अगली बार कोई सच्चा पुलिस वाला हिम्मत नहीं करेगा ‼️आगे आपकी मर्जी 🙏🙏गुजरात में मंत्री पुत्र की बदतमीजी से परेशान होकर महिला कांस्टेबल सुनीता यादव ने दिया इस्तीफा...गुजरात में मंत्री के पुत्र प्रकाश कानाणी और महिला कांस्‍टेबल सुनीता यादव के बीच हुए विवाद के बाद सूरत पुलिस अधीक्षक ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं. जानकारी के मुताबिक इस घटना के बाद सुनीता यादव ने इस्‍तीफा सौंप दिया है. बता दें कि महिला कांस्टेबल सुनीता यादव ने कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति के दौरान सूरत के वराछा इलाके में रात्रि कर्फ्यू में बिना मास्क पहने घूमने वाले युवकों को पकड़ा था. महिसा पुलिसकर्मी ने जब रात 10 बजे के बाद बिना मास्‍क पहले युवकों को घूमते पकड़ा तो मंत्री पुत्र अपने दोस्‍तों को छुड़ाने पहुंच गए. वराछा पुलिस थाने के पॉइंट पर महिला पुलिसकर्मी सुनीता यादव ने इन युवकों को पकड़ा. यहां इन युवकों ने सुनीता से दुर्व्‍यवहार किया तथा देख लेने की धमकी दी. अब इस पूरे घटनाक्रम का ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ तो हंगामा मच गया.जानकारी के मुताबिक युवकों ने मंत्री पुत्र का दोस्‍त होने का पॉवर दिखाया। इसके बाद मंत्री पुत्र प्रकाश कानाणी भी एमएलए गुजरात लिखी कार लेकर वहां पहुंचे तो उनकी सुनीता यादव से कहासुनी हुई। इस पर प्रकाश व दोस्‍तों ने उससे बदसलूकी की और देख लेने की धमकी दी। बता दें कि प्रकाश कानाणी सूरत से विधायक एवं राज्‍य सरकार में स्‍वास्‍थ्‍य राज्‍यमंत्री किशोर कानाणी के पुत्र हैं।खबर है कि घटना के बाद सुनीता यादव ने इस्‍तीफा दे दिया. गौरतलब है कि घटना के दौरान सुनीता ने पुलिस निरीक्षक बीएन सगर को इसकी जानकारी दी तो उन्होंने कहा कि उसका काम वहां डायमंड व टेक्‍सटाइल फैक्‍ट्री नहीं चलने देने की है. पॉइंट पर किसी को रोकने की नहीं है. कोरोना महामारी के चलते राज्‍य में रात्रि 10 से सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू लागू है और मास्‍क नहीं लगाने पर 200 रु का दंड का प्रावधान है!

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My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)