*Poem of Advocate* ना घूमने जाते हैं ना फिरने जाते है, *हम वकील है अदालत के सिवा कही'ना जाते हैं।* ना गाने सुना करते हैं, ना गजलें सुना करते हैं। *हम वकील हैं लोगों की परेशानी सुना करते हैं।* अनजान लोगों के दुःख-दर्द कुछ ऐसे पहचान लेते है। *हम वकील हैं कागज देखकर सब हाल जान लेते हैं।* किसी भी धर्म ग्रन्थ के लिए नही लड़ते है, *हम वकील है दंड संहिता, व्यवहार संहिता पढ़ते है।* ना डिस्को में जाते हैं हम, ना डेट पे जाते हैं।*हम वकील है अक्सर घर देर से जाते है।* ना खाकी पे एतबार , ना खद्दर पे इतना भरोसा करते है। *हम वकील है लोग हम पे कितना भरोसा करते है।* इश्क़-महरूनी, सर्द-गुलाबी और धानी हम पर सब रँग फब लेते हैं, *हम वकील हैं काले कोट के नीचे, जीवन के सब रंग ढक लेते है।* हिन्दू भी खड़ा रहता है मुस्लिम भी खड़ा रहता है,ये वकील का दिल है इंसानियत भीतर रहती है मजहब बाहर खड़ा रहता हैं। *।।हर वकील को समर्पित ।।* जय *हिन्द*
*Poem of Advocate*
ना घूमने जाते हैं ना फिरने जाते है,
*हम वकील है अदालत के सिवा कही'ना जाते हैं।*
ना गाने सुना करते हैं, ना गजलें सुना करते हैं।
*हम वकील हैं लोगों की परेशानी सुना करते हैं।*
अनजान लोगों के दुःख-दर्द कुछ ऐसे पहचान लेते है।
*हम वकील हैं कागज देखकर सब हाल जान लेते हैं।*
किसी भी धर्म ग्रन्थ के लिए नही लड़ते है,
*हम वकील है दंड संहिता, व्यवहार संहिता पढ़ते है।*
ना डिस्को में जाते हैं हम, ना डेट पे जाते हैं।
*हम वकील है अक्सर घर देर से जाते है।*
ना खाकी पे एतबार , ना खद्दर पे इतना भरोसा करते है।
*हम वकील है लोग हम पे कितना भरोसा करते है।*
इश्क़-महरूनी, सर्द-गुलाबी और धानी हम पर सब रँग फब लेते हैं,
*हम वकील हैं काले कोट के नीचे, जीवन के सब रंग ढक लेते है।*
हिन्दू भी खड़ा रहता है मुस्लिम भी खड़ा रहता है,
ये वकील का दिल है इंसानियत भीतर रहती है मजहब बाहर खड़ा रहता हैं।
*।।हर वकील को समर्पित ।।*
जय *हिन्द*
Comments